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भारत की पहली कॉर्डियोलॉजिस्ट थीं डॉ. एस पद्मावती, 103 साल की उम्र में कोविड-19 के चलते हुआ निधन

डॉ. एस पद्मावती की 103 साल की उम्र में कोविड-19 के चलते इस दुनिया में नहीं रहीं। उनका 103 वर्ष की आयु में कोविड-19 से निधन हो गया. नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट ने रविवार को यह जानकारी दी। उनका पिछले 11 दिनों से नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट में इलाज चल रहा था।

उनका जन्‍म म्‍यांमार में हुआ था। उन्होंने रंगून मेडिकल कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद वहां पर कार्डियोलोजी में करिअर की शुरुआत की। डॉ पद्मावती को भारत में पहली कार्डियक केयर यूनिट की स्थापना का श्रेय दिया जाता है। पद्मावती ने 1981 में नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट की स्थापना की थी।

डॉ. पद्मावती एक प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट हैं। उन्हें भारत की पहली फिमेल कॉर्डियोलॉजिस्ट का दर्जा प्राप्त है। पद्मावती को गॉड मदर ऑफ कार्डियोलॉजी कहा जाता है। कोविड-19 इंफेक्शन की वजह से उनका निधन हुआ।

पद्मावती को कोविड-19 के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी और बुखार भी था। निमोनिया का असर उनके दोनों लंग्स पर हुआ जिसकी वजह से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट की वजह से वे चल बसी।

पद्मावी के मेडिकल के क्षेत्र में सराहनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने 1967 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा 1992 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया।

डॉ पद्मावती को हार्वर्ड मेडिकल इंटरनेशनल अवार्ड के अलावा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हैं। उन्हें डॉक्टर बीसी रॉय और कमला मेनन रिसर्च अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।



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Dr. S. Padmavati, India's first cordologist, died at the age of 103 due to Kovid-19


from Dainik Bhaskar https://bit.ly/31K5lCS

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